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197+ Munafiq Shayari in Urdu: Best Poetry on Hypocrisy (2026)

Munafiq shayari has become one of the most searched forms of poetry among young readers who want words for the two-faced people in their lives. Whether it is a fake friend, a false relative, or someone who smiles to your face and talks behind your back, this collection of munafiq shayari captures that pain and betrayal in short, powerful lines.

In this article you will find 197+ munafiq shayari in Urdu, written fresh for 2026, covering every mood — from sad and emotional lines to sharp, sarcastic taunts (tanziya shayari). You will also find munafiq shayari about fake friends, broken relationships, two-faced people, and general quotes on hypocrisy that you can copy and share directly on WhatsApp status, Instagram captions, or Facebook posts.

Every piece of poetry below is original and written in simple, easy-to-understand words so it feels relatable and honest. Scroll down to explore the full collection of munafiq shayari, along with a quick FAQ section at the end.

New Munafiq Poetry

New Munafiq Poetry

1.

चेहरे पे मुस्कान लिए, दिल में ज़हर छुपाए

ऐसे मुनाफ़िक़ लोग हर मोड़ पे मिल जाएं

2.

जो सामने कुछ और है, पीछे कुछ और कहे

वो दोस्ती के नाम पे बस धोखा ही रचे

3.

आँखों में अपनापन, बातों में फ़रेब

ऐसे किरदार से बचना ही है बेहतर तरीब

4.

वक़्त पड़ने पे जो रंग बदल जाए

समझ लो वही मुनाफ़िक़ अपना कहलाए

5.

ज़ुबान पे शहद, दिल में नफ़रत भरी

ऐसी सोहबत से दूरी ही है बेहतरी

6.

जो हर महफ़िल में अलग रूप दिखाए

उसकी सच्चाई कभी सामने न आए

7.

वादों की झड़ी लगाकर, नीयत में खोट रखे

यही तो पहचान है उस मुनाफ़िक़ की सोच रखे

8.

जो अपनी ग़रज़ के लिए रिश्ते निभाए

वो सच्चा हरगिज़ नहीं, बस नाटक रचाए

9.

हर बात में हामी भरे, दिल में इनकार रखे

ऐसा किरदार अपने आस-पास न रखे

10.

जो पीठ पीछे वार करे, सामने मुस्कुराए

यही असली चेहरा मुनाफ़िक़ का कहलाए

11.

दिखावे की दुनिया में असली कम मिलते हैं

मुनाफ़िक़ के चेहरे कई रंग बदलते हैं

12.

जो सच को झूठ और झूठ को सच बताए

समझ लो वो दिल का साफ़ नहीं कहलाए

Top munafiq poetry in urdu text in english

Top munafiq poetry in urdu text in english

13.

भरी महफ़िल में यारी का दम भरते हैं

तनहाई में वही सबसे ज़्यादा डसते हैं

14.

जिनकी बातों में मिठास बहुत हो

उनकी नीयत पर शक करना जायज़ हो

15.

दोस्ती का लबादा ओढ़े फिरते हैं

अंदर से वो दुश्मन जैसे लगते हैं

16.

सामने आके गले भी लगाएंगे

पीछे मुड़ते ही खंजर चलाएंगे

17.

हर रिश्ते को मतलब से तोलते हैं

मुनाफ़िक़ अपनी असलियत छुपा के बोलते हैं

18.

जो वक़्त की नज़ाकत से रंग बदले

समझो उसकी वफ़ा भी बस दिखावा निकले

19.

झूठी तारीफ़ों में उलझाना आता है

इन्हें अपना मतलब निकालना आता है

20.

सच बोलने वाले अक्सर तन्हा होते हैं

मुनाफ़िक़ हर महफ़िल में सजते-सँवरते हैं

21.

जो अपनी ज़बान से मुकर जाते हैं

वही असल में मुनाफ़िक़ कहलाते हैं

22.

दो चेहरे रखने वालों की भीड़ बहुत है

सच्चे दिल वाला मिलना अब मुश्किल बहुत है

23.

जो हर बात पे कसमें खाते फिरते हैं

उनकी नीयत में खोट अक्सर छिपे रहते हैं

24.

मुनाफ़िक़ की पहचान बस इतनी सी है

जो कहे कुछ और, करे कुछ और सदा है

Also Read This: Top 117+ Best Love Shayari for Wife in Hindi & English 2026

Munafiq quotes in English

25.

जो बातों से जीते, अमल से हार जाए

उसकी हर बात पे शक होना लाज़मी है

26.

सच्चाई का लिबास पहन के झूठ बोले

यही तो असल मुनाफ़िक़ की पहचान होले

27.

जो हर मौसम में अपना रंग बदल दे

उससे रिश्ता रखना खुद को छल दे

28.

वफ़ा की बात करे, बेवफ़ाई से पेश आए

ऐसे इंसान से दूरी ही भली कहलाए

29.

जिसकी नीयत साफ़ नहीं, ज़ुबान मीठी है

उसकी दोस्ती अक्सर बस एक सीटी है

30.

दिखावे की मोहब्बत में असर नहीं होता

मुनाफ़िक़ का प्यार कभी सच्चा नहीं होता

31.

जो अपने फ़ायदे के बिना बात न करे

समझ लो उसका दिल कभी साथ न भरे

32.

चेहरे पर मासूमियत, दिल में हो चालाकी

यही सबसे बड़ी है इंसान की नाकामी

33.

जो हर किसी से अलग कहानी सुनाए

समझ लो वो कभी सच्चा नहीं कहलाए

34.

मुनाफ़िक़त एक ऐसी बीमारी है

जो रिश्तों की जड़ों में ज़हर भर देती है

35.

जो सामने वाले को दुनिया समझाए

पीछे उसी की बुराई करता जाए

36.

जिसकी बातें और नीयत में फ़र्क़ हो

उससे रिश्ता रखना खुद से बे-फ़र्क़ हो

Munafiq quotes In urdu english

37.

जो हर मुलाक़ात में नया चेहरा दिखाए

उसकी सच्चाई कभी समझ न आए

38.

ज़बान से मीठा, अमल से कड़वा हो

ऐसे किरदार से हर रिश्ता अधूरा हो

39.

जो अपनी ग़लती दूसरों पर मढ़ दे

वो मुनाफ़िक़ अपनी असलियत कभी न कह दे

40.

सामने तारीफ़, पीछे बुराई करे

ऐसा दोस्त दुश्मन से भी बड़ा वार करे

41.

जिसकी वफ़ा सिर्फ़ ज़रूरत तक रहे

उसकी दोस्ती को दोस्ती न कहें

42.

जो हर बात में अपना उल्लू सीधा करे

उसकी मोहब्बत भी बस एक सौदा करे

43.

दिल में कुछ, ज़बान पे कुछ और रखे

यही तो मुनाफ़िक़ की पहचान बताए

44.

जो रिश्तों को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करे

उसकी दोस्ती हर बार तुझे बर्बाद करे

45.

सच्चाई से जिसका वास्ता ना हो

उसकी हर बात का भरोसा ना हो

46.

जो अपनी हर बात से मुकर जाए

समझ लो उसकी नीयत कभी सच न आए

47.

ऐसे लोगों से रिश्ता निभाना मुश्किल है

जो हर मौके पे अपना चेहरा बदल दें

48.

मुनाफ़िक़ की सोहबत में सुकून नहीं मिलता

बस दिल को हर बार धोखा ही मिलता

Munafiq Quotes In islam

49.

ज़बान और दिल में फ़र्क़ रखने वालों से

हर दौर में बचने की नसीहत मिलती है

50.

जो वादा करके वादा तोड़ दे

उसकी सोहबत से दूरी अच्छी मानी जाए

51.

अमानत में खयानत करने वाला दिल

कभी सुकून की मंज़िल नहीं पाता

52.

झूठ बोलना जिसकी आदत बन जाए

उसकी बात पर एतबार कैसे आए

53.

जो अपने वादों का पास न रखे

उसकी नेकी भी बे-असर हो जाए

54.

सच्चाई और अमानतदारी ही असल पहचान है

मुनाफ़िक़त इंसान की सबसे बड़ी कमज़ोरी है

55.

जो दिखावे की इबादत करता जाए

उसका दिल असल में खाली रह जाए

56.

नेकी की बातें, बुराई पे अमल करे

ऐसा किरदार खुद को ही धोखा दे

57.

जिसकी नीयत में खलल हो, बात में मिठास

उसकी सोहबत से बचना है असली इलाज

58.

ईमान की बातें, बेईमानी का अमल

यही तो है मुनाफ़िक़त की असल शक्ल

59.

जो हर मस्जिद में अलग सूरत दिखाए

उसकी असली नीयत कभी सामने न आए

60.

सच्चा दिल वही जो अंदर-बाहर एक हो

मुनाफ़िक़ का हर रूप बस एक धोखा हो

Two faced Munafiq Quotes In English

61.

एक चेहरा दोस्ती का, एक चेहरा दुश्मनी का

यही असल पहचान है दो-रंगी बंदे का

62.

सामने कुछ और, महफ़िल में कुछ और कहे

ऐसे दोहरे किरदार से हर कोई डरे

63.

जो हर किसी के सामने रंग बदल ले

उसकी दोस्ती को दोस्ती मत समझ ले

64.

एक तरफ़ हमदर्दी, दूसरी तरफ़ साज़िश

यही है दो-चेहरे वाले की आदत ख़ास

65.

जो सामने वाले को अपना बताए

पीछे उसी की जड़ें खोदता जाए

66.

दो ज़बान वाला कभी सच्चा नहीं होता

उसका हर रिश्ता बस दिखावा होता

67.

सुबह कुछ और शाम को कुछ और कहे

ऐसे किरदार पर एतबार कौन करे

68.

एक हाथ में फूल, दूसरे में काँटे रखे

यही पहचान है उस दोहरे बंदे की

69.

जो अंदर से कुछ और, बाहर से कुछ और हो

उसकी सच्चाई कभी उजागर हो

70.

दो चेहरों वाले की दुनिया अलग होती है

जहाँ हर रिश्ता बस एक मौका होता है

71.

जो वक़्त के साथ अपना रूप बदले

समझ लो उसकी वफ़ा भी बस टल जाए

72.

असली चेहरा छुपाकर जो जीते हैं

वो खुद अपने आप से भी हारे रहते हैं

Munafiq Poetry in Urdu

73.

जिसकी बातों में फ़रेब की बू आए

उससे रिश्ता निभाना मुश्किल हो जाए

74.

सामने आके सलाम करे, पीछे बदनाम करे

ऐसे लोगों से रब ही बचाए

75.

दिल में कीना, ज़बान पे दुआ रखे

यही मुनाफ़िक़ की असली अदा रखे

76.

जो हर रिश्ते को फ़ायदे से जोड़े

उसका साथ छोड़ देना ही बेहतर ठहरे

77.

सच्ची मोहब्बत के दावे बहुत होते हैं

पर असली वफ़ा वाले कम ही होते हैं

78.

जो अपनी ज़बान का पक्का न हो

उसका हर वादा बस एक धोखा हो

79.

चेहरे पे मासूमियत, दिल में हो साज़िश

यही सबसे बड़ी है इंसानी नाइंसाफ़ी

80.

जो हर बात पर सफ़ाई देता फिरे

समझ लो उसकी नीयत में खोट भरे

81.

मुनाफ़िक़त का चेहरा हर बार नया होता है

पर उसका असल मक़सद बस धोखा होता है

82.

जो दिल से दूर, ज़बान से क़रीब हो

उससे रिश्ता रखना खुद से ग़रीब हो

83.

सच बोलने की हिम्मत जिनमें नहीं होती

उनकी दोस्ती भी असल में सच्ची नहीं होती

84.

जो हर मोड़ पे अपना मक़सद बदले

उसकी वफ़ा भी बस मौसम की तरह ढले

Munafiq Dost Poetry for Friends

85.

दोस्त बनकर जो राज़ छुपाए

वही दोस्ती की सबसे बड़ी हार कहलाए

86.

जो दोस्ती में भी मतलब ढूंढता है

वो सच्चा दोस्त कभी नहीं होता है

87.

सामने हँसकर गले लगाया करते हैं

पीछे मुड़ते ही राज़ फैलाया करते हैं

88.

जिस दोस्त की ज़बान पर मीठास हो

पर दिल में खोट, वो झूठी आस हो

89.

दोस्ती के नाम पे धोखा देने वाले

अपनी ही सोहबत में तन्हा रह जाते हैं

90.

जो मुसीबत में साथ छोड़ जाए

वो दोस्त नहीं, बस एक नाम कहलाए

91.

हर राज़ बाँटा, फिर भी धोखा मिला

यही है मुनाफ़िक़ दोस्ती का असल सिला

92.

जो तेरी कामयाबी से जलता रहे

वो दोस्त नहीं, दुश्मन ही असल में रहे

93.

सामने तारीफ़, पीठ पीछे बुराई करे

ऐसा दोस्त दुश्मन से भी बड़ा वार करे

94.

जो सिर्फ़ ज़रूरत में याद आए

उसकी दोस्ती कभी सच्ची न कहलाए

95.

भरोसा तोड़ने वाले दोस्त बहुत मिलते हैं

निभाने वाले अब कम ही मिलते हैं

96.

जो दोस्ती में भी हिसाब रखे

उसकी नीयत में हमेशा खोट रखे

Munafiq Jhoty Log Poetry

97.

झूठ बोलना जिनकी फ़ितरत बन जाए

उनकी हर बात पे शक होना लाज़मी है

98.

जो सच को झूठ का जामा पहनाए

वो अपनी ही नज़रों में गिर जाए

99.

झूठे वादों से दिल बहलाने वाले

अक्सर खुद भी तन्हा रह जाते हैं

100.

जो हर बात में झूठ की मिलावट करे

उससे रिश्ता निभाना बड़ा मुश्किल ठहरे

101.

झूठी कसमें खाकर भी मुकर जाते हैं

यही झूठे लोगों की पहचान कहलाते हैं

102.

जिसकी बातों पे एतबार करना मुश्किल हो

उससे दूरी रखना ही असल हल हो

103.

झूठ की बुनियाद पर रिश्ते नहीं टिकते

आज नहीं तो कल सच सामने आते हैं

104.

जो हर किसी को अलग कहानी सुनाए

उसकी सच्चाई कभी समझ न आए

105.

झूठे लोग बातों के शहज़ादे होते हैं

पर अमल में वो सबसे कमज़ोर होते हैं

106.

जो झूठ बोलकर मासूम बनता है

उसका असली चेहरा जल्द बेनक़ाब होता है

107.

झूठी मुस्कान के पीछे सच छुपाया जाए

यही आजकल की दुनिया का दस्तूर कहलाए

108.

जो अपनी ज़बान से खेलता रहे

उसकी दोस्ती भी बस एक धोखा रहे

Beautiful Munafiq Quotes in Urdu

109.

सच्चाई खूबसूरत होती है, चाहे कड़वी हो

मुनाफ़िक़त मीठी होकर भी अंदर से ज़हर हो

110.

जो अपने अंदर और बाहर एक जैसा हो

असल हुस्न तो उसी इंसान का हो

111.

दिखावे की चमक ज़्यादा देर नहीं टिकती

सच्ची नीयत ही असल में रौशनी बनती है

112.

जो दिल का साफ़ हो, ज़बान का सच्चा हो

उसकी सोहबत ही असल में अच्छी हो

113.

मुनाफ़िक़त एक ऐसा साया है

जो हर रिश्ते को धीरे-धीरे खा जाता है

114.

सादगी और सच्चाई में जो हुस्न है

वो दिखावे और फ़रेब में कहाँ है

115.

जो अपनी बात पर क़ायम रहते हैं

वही असल में खूबसूरत इंसान कहलाते हैं

116.

चेहरे की चमक से दिल नहीं पहचाना जाता

असली इंसान अमल से ही जाना जाता है

117.

जो वक़्त के साथ रंग न बदले

वही रिश्ता असल में क़ीमती बन जाए

118.

सच्चाई की खुशबू दूर तक जाती है

मुनाफ़िक़त की चमक जल्दी ही मुरझाती है

119.

जो दिल से जुड़े, दिखावे से नहीं

वही रिश्ता असल में टिकाऊ बनता है

120.

सच्चे लोग कम मिलते हैं इस दौर में

पर जो मिलें, वो ज़िंदगी को हसीन बना देते हैं

Munafiq Rishty Poetry on Relationships

121.

रिश्तों में जब मतलब आ जाए

समझो वहीं से दरार पड़ जाए

122.

जो सिर्फ़ ज़रूरत के वक़्त याद करे

उस रिश्ते को रिश्ता मत समझ ले

123.

अपनों में भी अजनबी छुपे होते हैं

जो मौका मिलते ही रंग दिखाते हैं

124.

खून के रिश्ते भी दिल से दूर हो जाएं

जब नीयत में मुनाफ़िक़त घर कर जाए

125.

जो रिश्ता फ़ायदे पर टिका हो

वो नुक़सान में टूटते देर न लगे

126.

अपनों की बेवफ़ाई सबसे गहरी चोट देती है

क्योंकि भरोसा वहीं सबसे ज़्यादा होता है

127.

जो रिश्ते निभाने का दिखावा करे

उसकी असलियत मुश्किल वक़्त में सामने आए

128.

हर रिश्ता खून का नहीं, नीयत का होता है

जो साफ़ न हो, वो रिश्ता बोझ होता है

129.

अपनों के बीच भी मुनाफ़िक़त पल जाती है

जब सच बोलने की हिम्मत कम हो जाती है

130.

जो सामने अपना, पीछे पराया हो जाए

उस रिश्ते का बोझ दिल पर भारी हो जाए

131.

रिश्तों में सच्चाई ही असल बुनियाद है

मुनाफ़िक़त हर रिश्ते की सबसे बड़ी बर्बादी है

132.

जो वक़्त पड़ने पर साथ छोड़ जाए

वो रिश्ता सिर्फ़ नाम का ही कहलाए

Munafiq Poetry in Urdu Text

133.

जिसकी नीयत में खोट, ज़बान में मिठास हो

उससे दूर रहना ही सबसे बड़ी आस हो

134.

चेहरे पे मासूमियत, दिल में साज़िश पले

ऐसे किरदार से हर रिश्ता जल्दी टले

135.

जो अपनी ग़लती दूसरों पर डाल दे

वो मुनाफ़िक़ अपनी असलियत कभी न बदले

136.

सामने वफ़ा की बातें, पीछे बेवफ़ाई हो

यही तो मुनाफ़िक़त की सबसे बड़ी सच्चाई हो

137.

जो हर मौके पर अपना पाला बदले

उसकी वफ़ादारी भी बस मौसम सी ढले

138.

झूठी हमदर्दी दिखाने वाले बहुत मिलते हैं

सच्चा साथ निभाने वाले कम ही मिलते हैं

139.

जो दिल से दूर, बातों से क़रीब हो

उससे रिश्ता रखना खुद से ग़रीब हो

140.

मुनाफ़िक़ की पहचान उसके अमल से होती है

उसकी बातें हमेशा उसके किरदार से जुदा होती हैं

141.

जो सच्चाई से मुँह मोड़ लेते हैं

वो खुद अपनी नज़रों में भी गिर जाते हैं

142.

ज़बान पर सलाम, दिल में इंतक़ाम रखे

यही असल पहचान है मुनाफ़िक़ के मक़ाम की

143.

जो हर बात में अपना फ़ायदा ढूंढे

उसकी दोस्ती भी बस एक सौदा ढूंढे

144.

सच बोलना जिनकी फ़ितरत में नहीं होता

उनका हर रिश्ता खोखला ही होता है

Tanziya Munafiq Poetry

145.

वाह री दुनिया, वाह तेरे किरदार

मुनाफ़िक़ भी अब बनते हैं संस्कार

146.

दिन में सौ बार वफ़ा की क़सम खाए

रात होते ही अपना असली रंग दिखाए

147.

महफ़िल में यारी, तनहाई में ग़ीबत हो

यही तो आजकल की असली मोहब्बत हो

148.

जो सामने झुक के सलाम करता है

पीछे उसी की जड़ खोदता रहता है

149.

मुनाफ़िक़ों की तरक़्क़ी देखकर हैरानी होती है

सच बोलने वालों की किस्मत बस वीरानी होती है

150.

सोशल मीडिया पे मोहब्बत दिखाई जाती है

असल ज़िंदगी में बस बेवफ़ाई निभाई जाती है

151.

जो हर पोस्ट पे ‘लव यू’ लिखते हैं

पीठ पीछे वही सबसे ज़्यादा बुरा कहते हैं

152.

वाह क्या अंदाज़ है दो-रंगी दुनिया का

हर चेहरे के पीछे एक और चेहरा छुपा है

153.

जो बातों से समाजसेवक बनते हैं

अमल में वो सबसे बड़े मतलबी निकलते हैं

154.

तारीफ़ों के पुल बाँधना आता है इन्हें

असल वक़्त पे मुँह मोड़ना भी आता है इन्हें

155.

मुनाफ़िक़ की ज़बान बड़ी शीरीं होती है

पर उसकी नीयत हमेशा कड़वी होती है

156.

जो हर जगह अपनी ईमानदारी का ढोल पीटे

उसकी असलियत बस एक मौके की मोहताज होती है

Munafiq Poetry in Urdu 2 lines

157.

सामने कुछ, पीछे कुछ और कहे

यही मुनाफ़िक़ की असली पहचान रहे

158.

ज़बान मीठी, नीयत खोटी हो

ऐसी दोस्ती हमेशा अधूरी हो

159.

दिल में नफ़रत, चेहरे पे मुस्कान हो

यही तो मुनाफ़िक़त की पहचान हो

160.

जो वक़्त के साथ रंग बदले

उसकी वफ़ा भी बस मौसम सी ढले

161.

झूठे वादे करने वाले बहुत मिलते हैं

सच्चे साथी अब कम ही मिलते हैं

162.

पीठ पीछे वार करे, सामने प्यार जताए

यही असल चेहरा मुनाफ़िक़ का कहलाए

163.

जो अपने फ़ायदे से रिश्ता तोले

उसकी मोहब्बत भी बस झूठी बोले

164.

दिखावे की दुनिया में असली कम हैं

मुनाफ़िक़ के चेहरे कई रंग हैं

165.

जो सच को झूठ में बदल दे

समझ लो उसका दिल साफ़ नहीं है

166.

हर बात में हामी, दिल में इनकार हो

ऐसे किरदार से हर रिश्ता बेकार हो

167.

जो पीठ पीछे बुराई करता जाए

सामने वही सबसे प्यारा बन जाए

168.

सच्चाई से जिसका नाता टूट जाए

उसकी हर बात झूठी लगने लग जाए

Munafiqat Poetry Lines in Urdu

169.

मुनाफ़िक़त एक ऐसी बीमारी है

जो अंदर ही अंदर रिश्तों को खा जाती है

170.

जो दिल और ज़बान में फ़र्क़ रखे

उसकी हर बात पर शक होना लाज़मी है

171.

सच्चाई और मुनाफ़िक़त साथ नहीं चलती

एक रौशनी है, दूसरी अंधेरा बनती है

172.

जो अपनी असलियत छुपाकर जीते हैं

वो खुद से भी झूठ बोलते रहते हैं

173.

मुनाफ़िक़त का कोई मज़हब नहीं होता

ये तो बस इंसान की नीयत का सौदा होता है

174.

जो हर मौके पर अपना रूप बदले

उसकी सच्चाई कभी सामने न आए

175.

दिखावे की इबादत, दिखावे की मोहब्बत

यही है आज के दौर की सबसे बड़ी हक़ीक़त

176.

जो ज़बान से कुछ, दिल से कुछ और कहे

उसकी दोस्ती भी बस एक फ़रेब रहे

177.

मुनाफ़िक़त से बचना ही असल हिफ़ाज़त है

सच्चाई ही ज़िंदगी की सबसे बड़ी दौलत है

178.

जो अपने मतलब के लिए रिश्ते बनाए

वो सच्चा इंसान कभी नहीं कहलाए

179.

दो चेहरों के साथ जीना आसान नहीं

एक दिन असलियत सामने आती ज़रूर है

180.

जो सच बोलने से कतराता रहे

समझो उसमें मुनाफ़िक़त का हिस्सा रहे

منافقت پر اشعار

181.

ظاہر میں کچھ اور، باطن میں کچھ اور رکھے

یہی تو منافقت کی سب سے بڑی پہچان ہے

182.

زبان پر مٹھاس، دل میں کدورت بھری ہو

ایسی رفاقت سے دوری ہی بہتری ہو

183.

جو وعدہ کر کے وعدہ توڑ دے

اُس کی ہر بات پر شک لازمی ہے

184.

سامنے سلام، پیٹھ پیچھے بدنامی کرے

ایسے کردار سے ہر رشتہ ٹوٹ جائے

185.

جو اپنے مفاد کے لیے رشتے نبھائے

وہ سچا ہرگز نہیں، بس دکھاوا ہے

186.

دل صاف نہ ہو، زبان چاہے میٹھی ہو

ایسی دوستی کبھی سچی نہیں ہوتی

187.

منافقت انسان کا سب سے بڑا عیب ہے

جو رشتوں کی جڑیں کھوکھلی کر دیتا ہے

188.

جو ہر محفل میں نیا روپ دکھائے

اُس کی اصلیت کبھی سامنے نہ آئے

189.

وقت کے ساتھ جو رنگ بدلتا رہے

سمجھ لو اُس کی وفا بھی جھوٹی رہے

190.

سچائی اور منافقت اکٹھے نہیں چلتیں

ایک روشنی ہے، دوسری اندھیرا بنتی ہے

کم ظرف منافق شاعری

191.

کم ظرف لوگ ترقی سے جل جاتے ہیں

اور اوپر سے مبارک باد بھی دیتے ہیں

192.

جو اپنی کمزوری دوسروں پر ڈالے

وہی اصل میں کم ظرف کہلائے

193.

چھوٹی سی بات پر جو رشتہ توڑ دے

اُس کی ظرفی کبھی بڑی نہیں ہوتی

194.

دکھاوے کی عزت دینے والے بہت ملتے ہیں

دل سے عزت کرنے والے کم ہی ملتے ہیں

195.

جو دوسروں کی کامیابی نہ دیکھ سکے

اُس کا ظرف ہمیشہ چھوٹا ہی رہے

196.

کم ظرف انسان تعریف سے بدل جاتا ہے

بڑا انسان تنقید میں بھی سنور جاتا ہے

197.

جو اپنی زبان سے بار بار مکرے

اُس کی حیثیت لوگوں کی نظر میں گرے

198.

منافق اور کم ظرف کا ساتھ گہرا ہے

دونوں کی نیت میں ہمیشہ کھوٹ رہا ہے

199.

جو دوسروں کو نیچا دکھا کر خوش ہو

وہ خود اپنی نظروں میں سب سے چھوٹا ہو

200.

اصل بڑائی ظرف سے ناپی جاتی ہے

دولت اور شہرت سے نہیں آتی ہے

Conclusion

Hypocrisy is something almost everyone experiences at some point, whether from a friend, a relative, or someone close. This collection of 197+ munafiq shayari was created to give words to that feeling — the sting of a fake smile, the ache of a broken promise, and the quiet strength of choosing honesty over pretense.

We hope these lines helped you express what was hard to put into words. Feel free to share them, save your favorites, and come back whenever you need the right words for a two-faced moment in your life.

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